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ग़ज़ल बिछा के दिल की बिसात बैठा,, लगा के बाजी हयात बैठा,, वही पुरानी ले बात बैठा , उदास तन्हा वो रात बैठा,, उसे मिलेगी कहाँ से मंजिल, ...