मुक्तक

1 Part

345 times read

9 Liked

दिल जीतने की चाह में जीता चला गया... अपमान के हर जहर को पीता चला गया... सोचा यही था प्यार के बदले मिलेगा प्या र, भारत उस दर से बेकदर रीता ...

×