मन अशान्त हैअधियारा है

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मन अशान्त हैअधियारा है दुख सह-सह मन दुखियारा है । अपना मान रहा है सबको किन्तु नही मिल सका किनारा ।। अपना पन की आपा धापी तृष्णा -मन पर रहती व्यापी ...

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