लेखनी कहानी -12-Jan-2026

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धुन्ध छाया है हवाओं में घुटन है। दुख बहुत है आंसुओं का आचमन है। आचरण में फैला भ्रष्टाचार अब। अंधकारों का मगर जंगल सघन है। चित्त उसका भी बहुत अशांत है। ...

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