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भरोसा तोड़ते हैं गै़र को हम राज़ करते हैं। बहुत से लोग हैं अपनों को ही नाराज़ करते हैं। परों से उड़ नहीं सकता कोई भी आसमानों तक। परिंदे हौसलों के ...