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अब दर्द सहेंगे हम बिना बात कब तलक। छुप कर किया करेंगे मुलाक़ात कब तलक। न कोई जुर्म मुझ पे न इलज़ाम कोई है। क्यों कैद ओ बंद मुझ पे, हवालात ...