नारी

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टूटकर बिखर जाऊँ ,हारकर बैठ जाऊँ मैं वो नहीं ... उम्मीद का दामन छोड़ दूँ,मुश्किलों से भाग जाऊँ  मैं वो नहीं ... किस्मत से लडकर ,जीतना है मुझको  अंधेरों में भी ...

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