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शब-ए-हिज्र कोई याद रखता तो कोई भूल गया है। शब-ए-वस्ल मेरी नश-नश में मानो जैसे घुल गया है। ©® प्रेमयाद कुमार नवीन जिला - महासमुन्द (छःग) ...