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प्यासे ही रहे साहिल की रेत की तरह, दिन जलाए कभी किरणें लपेटकर, कभी सो गए लहरें ओढ़ कर, कितने कदम दिल से होकर गुजरे, कितनी स्मृतियाँ राहों में गुम गयीं, ...