74 Part
361 times read
24 Liked
एक रुपए में दिन गुजर जाता है लाखों में शाम नहीं ढलती यह कैसा कागज है जिसके बिना जिंदगी नहीं चलती कपड़ों में जेब लगवाई है पर नोटों की गड्डी नहीं ...