हाय पैसा हाय जिंदगी

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एक रुपए में दिन गुजर जाता है  लाखों में शाम नहीं ढलती यह कैसा कागज है  जिसके बिना जिंदगी नहीं चलती कपड़ों में जेब लगवाई है  पर नोटों की गड्डी नहीं ...

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