लेखनी कविता -कोमल कुसुमों की मधुर रात- जयशंकर प्रसाद

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कोमल कुसुमों की मधुर रात- जयशंकर प्रसाद कोमल कुसुमों की मधुर रात !  शशि - शतदल का यह सुख विकास,  जिसमें निर्मल हो रहा हास,  उसकी सांसो का मलय वात ! ...

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