Amit Kumar

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धूप

विषय  धूप

आज धूप आकर अनजाने से
लगी खेलने खेल,
सात रंग से करा रही हैं
धूसर मन का मेल,
धूप घुसे यह आंतरतन में
जब खिड़की दे खोल,
खुलकर डोले अगर प्यार के 
दो अक्षर दे बोल।

एक एक टुकड़े में इसके
है नभ का अभ्यास,
किरण किरन इनकी ले आती 
सूरज अपने पास
सोना बनकर चमक उठी है
मन के दर्पण की धूल
जीवन के पथरीले पथ पर
लगे झूमने फूल।
भोर गुलाब सी अब लगती
चम्पा जैसा शाम
धूम सुनहरी ने लिख दी है
पाती सुख के नाम।

पंडित अमित कुमार शर्मा
प्रयागराज उत्तर प्रदेश

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5 Comments

Sangeeta charan

26-Aug-2021 03:18 PM

😃✌️

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Sapna shah

26-Aug-2021 05:51 AM

Nice

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Swati chourasia

25-Aug-2021 01:20 PM

Very nice

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