तेरा मन

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तन से अच्छा तेरा मन है बरस रही ऋतु तू सावन है । सजदा करने का मन करता ऑखे तेरी सुन्दर वन है ।। चन्दन जैसी देह तुम्हारी  महक रही हो ...

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