नीति-वचन-8

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*नीति-वचन*-8 त्वचा-अकर्षन जदपि लुभावै। छबि-अंतरतम असल कहावै।।    पहिरि पटम्बर हर तन सोहै।    पर नर-बोली-भाषा मोहै।। सिच्छा-दिच्छा-कला बिहीना। सींग-पूँछ पसु जानउ हीना।।     चरित-आचरन,संपति-पूजी।     जीवन कै नहिं ...

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